जमुई, अप्रैल 28 -- झाझा , नगर संवाददाता सरकार शिक्षा विभाग में कितने भी दावे कर ले, विकास मद में कितनी भी राशि खर्च कर ले, परंतु लगता है, आज भी वही पुराने बिहार में हम लोग रहने को विवश हैं जहां राशि खर्च हो जाने के बाद भी योजना का फलाफल धरातल पर दिखता नजर नहीं आता। लगता है जैसे विभागीय भ्रष्टाचार का असर शिक्षा विभाग में आज भी पीछा नहीं छोड़ रहा है। उक्त पीड़ादायक विचार झाझा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय उर्दू बाराजोर के छात्र-छात्राओं के अभिभावक हिंदुस्तान संवाददाता से कहते सुने गए। अभिभावकों ने कहा, क्या आप सोच सकते हैं कि जिस के के पाठक जैसे कड़क अपर शिक्षा मुख्य सचिव के समय में विद्यालय में पेयजल के लिए लगभग साढ़े तीन लाख की राशि कागजों पर खर्च की गई हो और उसका फलाफल यही हो कि वर्ष बीत जाने के बाद भी ना बोरिंग काम कर रहा है और ना पेयजल...
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