नई दिल्ली, नवम्बर 30 -- हरिवंश चतुर्वेदी, महानिदेशक, आईआईएलएमबी कभी-कभी कोई साधारण घटना मील का पत्थर बनकर युगांतरकारी बदलावों को जन्म देती है। एक निजी विश्वविद्यालय की छात्रा को अपने नाम-परिवर्तन को विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में दर्ज करवाने को लेकर जो तकलीफें झेलनी पड़ीं, उसे लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने न केवल दोषी विश्वविद्यालय पर सख्त कार्रवाई की, बल्कि देश के सभी 603 निजी विश्वविद्यालयों के अब तक के कामकाज और उनके वित्तीय प्रबंधन की जांच के आदेश भी दिए हैं। इससे जुड़े कई सवाल अहम हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती हमारी उच्च शिक्षा को उसकी मौजूदा चिंताजनक स्थिति से उबार पाएगी? क्या यह सख्ती राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 द्वारा सुझाए गए नियमन मॉडल को कूड़ेदान में डाल देगी, जिसमें हल्के नियमन और चुस्त प्रबंधन को अपनाने का सुझाव दिया गया है? ...