नई दिल्ली, दिसम्बर 16 -- बद्री नारायण,कुलपति, टीआईएसएस, मुंबई केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल-2025' पेश कर दिया है। यह बिल अभी संसदीय विमर्श की प्रक्रियाओं से गुजर रहा है, इसलिए इसके प्रभावों पर विचार करने का यही उचित समय है। इसे पेश करते वक्त इसके अनेक सकरात्मक परिणामों की चर्चा की गई, पर शिक्षा जगत में इसे लेकर कुछ उलझनें भी हैं, जिनकी थोड़ी अभिव्यक्ति मीडिया विमर्शों में दिख रही है। समाज जैसे-जैसे जटिल होता जाता है, शिक्षा के संचालन की प्रक्रियाएं भी जटिल होती जाती हैं, इसलिए जरूरी होता है कि समय-समय पर इसके ढांचों में जरूरी परिवर्तन किए जाएं। गुलाम भारत में शिक्षा संचालन का एक ढांचा था। आजादी के बाद एक नया ढांचा विकसित किया गया, जो एक प्रकार से औपनिवेशिक ढांचे से देश को मुक्त करने क...