झांसी, अक्टूबर 28 -- शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ लोक आस्था का महापर्व छठ कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर ब्रह्म मुहूर्त में उगते सूर्य की उपासना के साथ अगले साल के लिए विदा हो गया। मंगलवार सुबह-सवेरे नदी, तालाब, पोखरों पर आस्था का मेला लग गया। व्रती महिलाओं-पुरुषों ने सूर्य को अघ्र्य दिया। सब्जी, दूध, गन्ने, फल-फूल सहित अन्य आरती उतारी। परिवार की तरक्की, संतान की सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं खरना के साथ शुरू हुए 36 घंटे से व्रत भी परायण किया गया। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुहाग की सलामती की भी कामना की। वहीं पुरुषों ने गले मिलकर एक-दूसरे को बधाई दी। नदी, तालाब, पोखरों का मुहाना '..हाथ जोड़ी करीला विनतिया छठी मैया होईह सहाय' छठ मैया के गीतों से गूंज उठा। व्रतियों में इतना उत्साह था कि माहौल खुद-ब-खुद थिरक उठा। हरेक चेहरा खिलखि...