समस्तीपुर, दिसम्बर 3 -- शहर में वर्षों तक सामान्य रिक्शा का संचालन होता था। गरीब तबके के लोग मेहनत कर रिक्शा खींचकर चलाते थे और राहगीरों को उनके गंतव्य तक पहुंचाते थे। लेकिन, नई टेक्नालॉजी आने के बाद जिले में 2015 से इलेक्ट्रिक रिक्शा यानि ई-रिक्शा चलना शुरू हुआ। इसके बाद धीरे धीरे सामान्य रिक्शा का संचालन कम होते चला गया। लोग जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंचने के सामान्य रिक्शा की सवारी करने से परहेज करने लगे। रेलवे स्टेशन पर रिक्शा चालकों ने कहा कि शहर में ना ही स्टैंड बना है और न ही कोई अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। रिक्शा चालकों ने बताया कि शहर में जाम लगने का सारा आरोप उन्हीं पर लगता है। पुलिस रिक्शा का डंडा चला देते है। रिक्शा को सड़क के किनारे एक मिनट भी खड़ा नहीं होने देते हैं। जबकि सड़कों पर चार पहिया वाहनों की पार्किंग प्रतिदिन चार...