भागलपुर, अप्रैल 20 -- ईश्वर के आधार के बिना यह जीव निराधार है। जीव अंत में सब कुछ छोड़कर चला जाता है। जिनके लिए सारे जीवन का भोग दिया। मेहनत की, धन अर्जन किया वो भी छोड़कर चले जाते हैं। मनुष्य का हाय-हाय करके जान चली जाती है। अंत काल में पछताता है। मनुष्यों को चाहिए कि अभी से ही श्रीहरि का नाम लेना शुरू कर दें। उनका स्मरण करेंगे तो अंत काल में भी श्रीहरि ही याद आएंगे। यह बातें धुआबे चंडिका स्थान में चल रहे नौ दिवसीय श्रीरुद्र चंडी महायज्ञ के सातवें दिन श्रीमद्भागवत कथा वाचन करते हुए कथावाचक अभयानंद अभिषेक शास्त्री ने कही है। कहा कि मनुष्य जीवनभर संग्रह करता है पशु संग्रह नहीं करता है। मनुष्य आने वाले कल की चिंता करते हैं, पशु कल की चिंता नहीं करते हैं। मनुष्य अपने लिए चिंता करते हैं श्रीहरि के लिए नहीं। यदि श्रीहरि की भी चिंता करेंगे। सुख...
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