जहानाबाद, जनवरी 16 -- ठंड में झोपड़ी देकर रहने को विवश रहते हैं मजदूर शौचालय के अभाव में खुले में शौच करने को विवश हैं मजदूर करपी, निज संवाददाता। ईंट-भट्ठों पर कड़ी धूप, ठंड और बारिश में दिन-रात मेहनत करने वाले मजदूर आज भी मूलभूत मानवाधिकारों से वंचित हैं। न तो उनके रहने के लिए उचित आवास की व्यवस्था है और न ही शौच जैसी आवश्यक सुविधा है। श्रमिक खुले में शौच करने को मजबूर हैं। ईंट-भट्ठों पर कार्यरत अधिकांश श्रमिक दूसरे राज्यों या दूर-दराज के इलाकों से लाए जाते हैं। ठेकेदारों के माध्यम से इन्हें काम पर लगाया जाता है और बाद में इन्हें कर्ज, एडवांस और मजदूरी के नाम पर बंधुआ बना लिया जाता है। जहानाबाद जिले के मखदुमपुर के रहने वाले एक श्रमिक से पूछे जाने पर बताया कि केवल खोराकी दिया जाता है। जाते समय पैसा दिया जाता है। वह भी किसी किसी साल पैसे के ...