सहरसा, अगस्त 29 -- सहरसा, हमारे प्रतिनिधि। जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल सदर अस्पताल, जिसे मॉडल अस्पताल का दर्जा दिया गया है, आज मरीजों की परेशानियों का अड्डा बन गया है। इमरजेंसी वार्ड जैसे संवेदनशील स्थान पर भी जरूरी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है और मरीजों को बाहर की दवा दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। बुधवार की शाम बटराहा की संगीता देवी पेट दर्द की शिकायत लेकर इमरजेंसी पहुंचीं। चिकित्सक ने उन्हें ट्रामाडोल इंजेक्शन देने का आदेश दिया, लेकिन अस्पताल में यह उपलब्ध नहीं था। मजबूरी में उनके पति अरुण कुमार को बाहर जाकर दवा खरीदनी पड़ी। यह घटना अस्पताल की लचर व्यवस्था का सबसे बड़ा प्रमाण है। सिर्फ दवा ही नहीं, मरीजों को साफ-सुथरे बेड और चादर तक नसीब नहीं होते। संगीता देवी को भी इलाज के दौरान अस्पताल की ओर से एक अदद चादर नहीं दी गई। उन्हें फटे गद...