मुरादाबाद, जनवरी 3 -- मुरादाबाद। सेहत के मामले में भले चंगे होते हुए भी जो लोग परिस्थिति को जरा सा विषम महसूस करके मायूस हो जाते हैं और हार मानने लगते हैं उनके सामने नेत्रहीन बिन्नी कुमारी मिसाल बनकर सामने आई है। दोनों आंखों से नहीं देख पाने की लाचारी के आगे उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि खुद से जुड़ी इस हकीकत को स्वीकार करके इन्हीं परिस्थितियों में ज्यादा से ज्यादा स्मार्ट होकर काम करने का मंत्र आत्मसात कर लिया। नेत्रहीन बिन्नी की उपलब्धि सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि वह रोजाना अपने जैसे कई नेत्रहीनों को ज्यादा से ज्यादा स्मार्ट बनने के गुर सिखा रही हैं। सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान में नेत्रहीनों को ब्रेल लिपि के साथ ही डिजिटल प्लेटफार्म पर स्मार्ट बनाने के ऐसे तरीके बता रही हैं जिनसे वह नेत्रहीन होते हुए भी बैंकिंग लेनदेन समेत र...
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