इटावा औरैया, अक्टूबर 28 -- ग्राम कैस्त में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति, भावना और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण प्रसंगों का रसपान किया। कथा वाचक आचार्य मुनेंद्र दुबे ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग, निषादराज की सेवा भावना तथा केवट संवाद की अमृतमयी कथा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, सेवा, करुणा और आदर्श जीवन का प्रतीक है। निषादराज और केवट जैसे पात्र यह संदेश देते हैं कि सच्ची भक्ति और सेवा का कोई जाति या वर्ग नहीं होता, बल्कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल प्रेम, विनम्रता और हृदय की पवित्रता से होकर जाता है। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान देकर मानवता का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। कथा के दौरान 'जय श्रीराम' के उद्घोषों से वातावरण गूंज उठा। श्रद...
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