इटावा औरैया, नवम्बर 23 -- सेवा भारती के सेवा कार्यों के सहायतार्थ प्रदर्शनी पंडाल में हो रही रघुकुल नन्दन श्री राम कथा के पंचम दिवस की कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि जीवन का चौथापन आते ही पारिवारिक दायित्वों से मुक्ति लेकर व्यक्ति को हरि भजन में लग जाना चाहिए। शनिवार को हुई कथा में विधान परिषद के सभापति कुं. मानवेंद्र सिंह ने व्यासपीठ से आशीर्वाद लिया। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आचार्य श्री ने कहा कि अपने चारों पुत्रों का विवाह करके महाराज दशरथ एक माह के बाद जनकपुर से लौटकर अयोध्या आए तो अवध में रिद्धि सिद्धि समृद्धि की बाढ़ आ गई। उसके एक माह के बाद जब राज्यसभा बैठी तो महाराज दशरथ ने भरी सभा में शीशे में अपना मुंह देखा। शीशा देखने के तात्पर्य को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ये दर्पण व्यक्ति का गुरु भी है और दुश्मन...