रांची, सितम्बर 27 -- सिल्ली, प्रतिनिधि। सिल्ली का आदि दुर्गा मंदिर दुर्गा पूजा स्थल आसपास के क्षेत्रों में सबसे प्राचीन माना जाता है। पूजा समिति के संरक्षक और सिल्ली के राजा पुष्पेंद्र नाथ सिंह देव के अनुसार इस मंदिर में पूजा की शुरुआत का सटीक समय भले ज्ञात न हो, लेकिन यह परंपरा लगभग 155 वर्ष पुरानी है। शुरुआत में दुर्गा पूजा राजबाड़ी परिसर में होती थी। बाद में इसे आदि दुर्गा मंदिर परिसर में स्थानांतरित किया गया। पहले के समय में पूजा के दौरान भैंसे की बलि (काड़ा) दी जाती थी। जिस स्थान पर बलि दी जाती थी, आज भी लोग उस जगह को कांड़ाकांटा के नाम से जानते हैं। वर्तमान में यह स्थान एक बड़ी बस्ती के रूप में विकसित हो चुका है। 1956 से वैष्णव मत से शुरू हुई पूजा: 1956 में राजा साहेब के दादाजी स्वर्गीय उपेंद्र नाथ सिंह देव ने बलि प्रथा को पूरी तरह ...
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