बागपत, दिसम्बर 7 -- आलू की दोगुनी-चौगुनी पैदावार के चक्कर में किसानों ने मिट्टी को ही बीमार कर डाला है। असंतुलित तरीके से डीएम का अंधाधुंध प्रयोग किए जाने व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग के चलते मिट्टी का आर्गेनिक कार्बन निम्न स्तर पर पहुंच चुका है। इतना ही नहीं जिंक, आयरन, पोटाश, सल्फर और नाइट्रोजन की स्थिति भी दयनीय हो चली है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह फसल चक्र में सुधार नहीं किया गया, तो फसल उत्पादन काफी कम हो जाएगा। मिट्टी बंजर बन जाएगी। बागपत जनपद के खेकड़ा, पिलाना और बागपत ब्लॉक क्षेत्र में आलू की खेती बड़े स्तर पर की जाती है। अधिकारियों की मानें, तो इन तीनों ब्लॉकों में पांच हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर किसान आलू की खेती करते है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आलू की बुआई से लेकर खुदाई तक किसान डीएपी से लेकर अन्य कीटनाशक...