ललितपुर, नवम्बर 8 -- गांवों के खेतों की मिट्टी और वातावरण को पालीथिन तथा प्लास्टिक की त्रासदी से बचाने की मंशा से बनाए गए आरआरसी सेंटर (ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र) विभागीय कागजों पर भले ही क्रियाशील नजर आते हों लेकिन अधिकतर सेंटरों पर ताला लटक रहा है। गांव के प्रमुख मार्गों और गलियों में सूखा कचरा का अंबार लगा हुआ है। नालियां बजबजा रही हैं। पालीथिन और प्लास्टिक कचरा शहरों से होते हुए गांवों तक पहुंच गया है। प्रतिदिन इसकी मात्रा बढ़ती जा रही है लेकिन इसके निस्तारण की व्यवस्था का ढांचा तैयार नहीं हो सका है। जिसकी वजह से इस कचरे ने खेतों की मिट्टी की उर्वरा क्षमता और वातावरण को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकार ने इन स्थितियों से निपटने के लिए गांवों में सामुदायिक कचरा पात्र और खाद गड्ढ़े बनवाए। इसके अलावा ठोस अपशिष्ट प्रबं...
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