नई दिल्ली, फरवरी 13 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद वर्ष 2023 से खाली नहीं छोड़े जा सकते, भले ही कानून में नियुक्ति की कोई समय-सीमा तय न हो। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने केंद्र सरकार के इस तर्क को गलतफहमी और अस्वीकार्य बताया कि अदालत नियुक्ति का निर्देश नहीं दे सकती। अदालत ने कहा कि आयोग अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बना है, जबकि वर्तमान में यह केवल एक सदस्य के साथ काम कर रहा है। पीठ ने शिक्षा मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह रिक्त पदों को भरने के लिए उठाए गए कदमों और तय समय-सीमा का विस्तृत हलफनामा दाखिल करे। अदालत ने टिप्पणी की ...
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