रांची, फरवरी 3 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, खान-पान और प्रकृति से जुड़े जीवन दर्शन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षण तब सामने आया, जब आयरलैंड के डबलिन विश्वविद्यालय से आईं शोधार्थी केटी हैंस ने बुधवार को मंडीएड्डपा, हुटार (खूंटी) का दौरा किया। उन्होंने मुंडा, असुर, बिरजिया, उरांव व संथाल जनजातियों के पारंपरिक, स्वदेशी भोजन का स्वाद लिया। केटी प्रतिरक्षा विज्ञान पर शोध कर रही हैं और इसी सिलसिले में भारत के विभिन्न शहरों का दौरा कर रही हैं। उनके झारखंड आने का उद्देश्य जनजातीय खानपान के विशिष्टताओं को समझना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में स्थानीय अनाज, वनोपजों की भूमिका पर केंद्रित है। मंडीएड्डपा फूडचेन झारखंड की आदिवासी भोजन संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है। इ...