नई दिल्ली, अगस्त 27 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि 'आपराधिक अदालतें लिपिकीय या अंकगणितीय त्रुटियों को सुधारने के अलावा अपने फैसले का न तो समीक्षा कर सकती है और ही उसे वापस ले सकती है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द करते हुए यह फैसला दिया है, जिसमें कंपनी के विवाद से जुड़े मामले में झूठी गवाही देने के आरोप में कार्यवाही को दोबारा से खोलने का आदेश दिया था। जबकि हाईकोर्ट ने पहले झूठी गवाही देने के मामले में कार्यवाही की मांग को खारिज कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की पीठ ने हाल ही में पारित अपने फैसले में कहा है कि ' आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत आपराधिक अदालतों को अपने फैसले में किसी तरह का बदलाव या समीक्षा करने का कोई अधिकार...