बिजनौर, मई 15 -- आज के समय में संगठित परिवार में रहना तो दूर सोच रखना भी अतिशयोक्ति से काम नहीं है, लेकिन गांव पूंडरी कला का एक परिवार आज की एकाकी सोच को दरकिनार कर संयुक्त रूप से जीवन यापन कर रहा है। पूंडरी कला निवासी आनंद प्रकाश ने भरा पूरा परिवार संस्कारों के साथ संजोकर रखा, जिसके चलते आज के एकाकी परिवार के चलन के बीच इनके चार पुत्र विपिन कुमार, विनीत कुमार, शुभम कुमार और रवि कुमार अपने वैवाहिक जीवन को एक संयुक्त परिवार की नींव रखकर यापन कर रहे हैं। आनंद प्रकाश ने बच्चों को संस्कार ऐसे दिए कि काम भले ही सबके अलग-अलग हैं लेकिन, घर के चूल्हे का बटवारा नहीं हुआ। रिश्ता सास-बहू का हो या फिर देवरानी-जेठानी का सबके बीच सामंजस्य ऐसा बिठाया कि आज बुढ़ापे में भी आनंद अपनी पत्नी रमादेवी के साथ चार बेटे और बहु तथा पांच पोती पोतो के साथ खुशहाल जीव...
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