रामगढ़, फरवरी 13 -- रामगढ़, निज प्रतिनिधि। ब्रज गोपिका सेवा मिशन की ओर से आयोजित 21 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के 14वें दिन शुक्रवार को पूज्य स्वामी युगल शरण ने कर्म मार्ग की चर्चा को आगे बढ़ाते हुए धर्म के दो स्वरूपों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म दो प्रकार का होता है-शारीरिक धर्म (वर्णाश्रम या अपर धर्म) और आध्यात्मिक धर्म (पर धर्म)। मनुष्य को केवल शारीरिक धर्म तक सीमित नहीं रहना चाहिए, क्योंकि भगवान ने यह शरीर केवल सांसारिक कर्तव्यों के लिए नहीं दिया है। आध्यात्मिक धर्म आत्मा का वास्तविक धर्म है और उसी का पालन जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि जब व्यक्ति आध्यात्मिक धर्म को अपनाता है तो उसका जीवन स्वतः संतुलित हो जाता है और शारीरिक धर्म का पालन अलग से आवश्यक नहीं रह जाता। आत्मा का कल्याण और परमात्मा से जुड़ाव ही मानव जी...