शामली, नवम्बर 5 -- शामली। शहर के जैन धर्मशाला में बुधवार को मुनि श्री 108 विव्रत सागर के सानिध्य में धार्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया। उन्होने प्रवचन में कहा कि आत्मा को सच्चा स्वामी मानना ही आध्यात्मिक जीवन का मूल तत्व है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर स्थित गुरु, भगवान और साधु की पहचान करता है, तभी वह वास्तविक आत्म-ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर होता है। मुनि श्री ने कहा कि सच्चा गुरु और भगवान बाहर नहीं, बल्कि हमारी आत्मा ही है। बाहरी गुरु केवल मार्गदर्शन कर सकते हैं, परंतु मुक्ति का मार्ग व्यक्ति को स्वयं बनाना पड़ता है। जो व्यक्ति अपनी आत्मा को ही भगवान और गुरु के रूप में मान लेता है, वह बाहरी पूजा, अर्चना और दान की सीमाओं से ऊपर उठकर आत्मिक कल्याण की दिशा में अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त केवल एक ही स्वामी का होता है। अन...