हापुड़, नवम्बर 11 -- हापुड़। अनेक पाप व कष्ट से छुटकारा देने के साथ केतु ग्रह पीड़ा से मुक्ति प्रदान करने वाला पर्व कालभैरव जयंती 12 नवंबर को मनाई जाएगी। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पाण्डेय ने कहा कि कलयुग में ब्रह्महत्या सहित अनेक कष्टों से मुक्ति प्रदान करने वाले भैरव ही है जो साक्षात भगवान शिव के ही रूप है। अष्टमी तिथि 11 नवंबर की रात 11 बजकर 09 बजे से प्रारंभ होकर 12 नवंबर की रात 10 बजकर 58 मिनट तक है। शिवमहापुराण, स्कंदपुराण के अनुसार भगवान भैरव का आविर्भाव मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी को हुआ था। अत: इस दिन कालभैरव की पूजा करनी चाहिए तथा काल भैरव मंदिर में सफ़ेद झंडा भी लगाना चाहिए। केतु ग्रह से पीड़ित व्यक्ति को पूजन, मंत्रजप, हवन करना चाहिए, इससे लाभ होगा। ब्रह्मयोग होने से शत्रु शान्ति एवं अज्ञात भय ब...
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