शामली, अक्टूबर 29 -- शामली। शहर के कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने राम-परशुराम मिलन का अद्भुत प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यह प्रसंग केवल दो व्यक्तियों का संवाद नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के समन्वय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जैसे ही प्रभु श्रीराम ने शिव धनुष को तोड़ा, उसकी भयंकर टंकार से मलय पर्वत पर तपस्या कर रहे भगवान परशुराम का ध्यान भंग हो गया और वे हाथ में फरसा लेकर जनकपुर की सभा में आ पहुंचे। परशुराम जी क्षत्रियों के काल माने जाते हैं। महाराज जनक और परशुराम दोनों महापुरुष थे, किंतु उनके स्वभाव में भिन्नता थी।जनक क्षत्रिय कुल में जन्म लेकर ऋषियों जैसा आचरण करते हैं, जबकि परशुराम ऋषि कुल में जन्म लेकर क्षत्रियों जैसा व्यवहार करते हैं। सभा में पहुंचे परशुराम क्रोध से आग-...
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