नई दिल्ली, जनवरी 9 -- आज के दौर में डेटिंग पहले से कहीं ज्यादा जटिल, थकाने वाली और भावनात्मक रूप से उलझी हुई महसूस होती है। जहां पहले रिश्ते समय, धैर्य और धीरे-धीरे समझ विकसित होने पर टिकते थे, वहीं आज डेटिंग ऐप्स, तेज लाइफस्टाइल और लगातार विकल्पों की मौजूदगी ने कनेक्शन को सतही बना दिया है। कई लोग यह महसूस करते हैं कि सही इंसान मिलने के बावजूद भी मन पूरी तरह संतुष्ट नहीं होता। मुंबई के न्यूरोलॉजिस्ट और TEDx स्पीकर डॉ सिद्धार्थ वारियर बताते हैं कि आज की डेटिंग इसलिए मुश्किल हो गई है क्योंकि लोग एक साथ दो सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं- क्या यह इंसान मेरे लिए सही है और क्या कहीं कोई इससे बेहतर विकल्प मौजूद है? क्या आपको भी लगता है कि आज के समय में डेटिंग पहले से कहीं ज्यादा उलझन भरी, थकाने वाली और भावनात्मक रूप से कठिन हो गई है? ...