शामली, नवम्बर 27 -- शहर के जैन धर्मशाला में गुरूवार को आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज के भव्य मंगल प्रवेश का आयोजन किया गया। इस दौरान सकल जैन समाज एवं दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री का श्रद्धापूर्वक स्वागत कर उन्हें श्रीफल भेंट किया। जैन मुनि नयन सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि आचार्य शब्द केवल दिगंबर परंपरा का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा दाताओं और गुरुओं के सम्मान के लिए भी प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि दिगंबर आचार्य परंपरा की शुरुआत गौतम स्वामी से मानी जाती है। आचार्य श्री ने कहा कि संसार में प्रगति और परिवर्तन एक प्राकृतिक नियम है। जो व्यक्ति, समाज या राष्ट्र परिवर्तन को स्वीकार नहीं करते, समय के साथ विलुप्त हो जाते हैं। जीवन में मूल सिद्धांतों, विशेषकर वितरागता को बनाए रखते हुए व्...
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