रुडकी, जनवरी 21 -- आईआईटी रुड़की के नेतृत्व में संचालित रूटैज स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) ने अल्मोड़ा के खूंट गांव में ग्रामीण विकास का एक अनूठा मॉडल पेश किया है। एकीकृत खेती, तकनीक और महिला सशक्तिकरण के मेल से यहां के समुदायों की आजीविका और जीवन स्तर में क्रांतिकारी बदलाव आया है। इस पहल के तहत एकीकृत खेती की दिशा में एक लाख से अधिक शहतूत के पौधे लगाए गए। रेशम विभाग और नेहिर हिमालयन फाउंडेशन के सहयोग से ग्रामीण महिलाओं ने इस अभियान का नेतृत्व किया। अब किसान शहतूत के साथ हल्दी और अदरक जैसी फसलों की मिश्रित खेती कर रहे हैं। इससे न केवल रेशम उत्पादन के द्वार खुले हैं, बल्कि शहतूत चाय जैसे मूल्य-वर्धित उत्पादों के माध्यम से स्थानीय उद्यम को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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