नई दिल्ली, अक्टूबर 30 -- कार्तिक मास में तुलसी और आंवले का पूजन का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। आप कार्तिक शुक्ल की नवमी और शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को आंवले का पूजन कर सकते हैं। इन दोनों तिथि पर आंवला का पूजन फलदायी है। आंवला सब पापों का नाश करने वाला है। इसके दर्शन से दोगुना ओर फल खाने से तीन गुना पुण्य होता है। इसलिए हमेशा आंवले का इस्तेमाल करना चाहिए। ये कैसे उत्पन्न हुआ और कार्तिक में इसकी पूजा से क्या फल मिलता है। यह आप यहां जान सकते हैं। पहले जान लें कि आंवला नवमी या वैकुंठ चतुर्दशी के दिन इसकी पूजा का महत्व है। इस दिन आंवले के पेड़ की छाया में जाएं और श्रीहरिका पूजन करें। उन्हें फल-फूल मिष्ठान चढ़ाएं, परिक्रमा करें और फिर आंवले की छाया में बैठकर कथा सुनें। इस दिन आवंले के पेड़ के नीचे बैठकर ब्राह्यणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। ...
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