जमशेदपुर, जनवरी 28 -- अपहरण के बाद उद्योगपति कैरव गांधी की आंखों पर पट्टी बांध दी गई थी। हालांकि उस समय कैरव को यह जानकारी नहीं थी कि उसका अपहरण हो चुका है। अपहरणकर्ताओं ने उसकी आंखों पर इसलिए पट्टी बांधी, ताकि उसे यह पता न चल सके कि उसे कहां और किस रास्ते से ले जाया जा रहा है। अपहरण के बाद रास्ते में सभी ने दोपहर का खाना खाया, जिससे कांदरबेड़ा से बुंडू टोल पहुंचने में करीब दो घंटे का समय लगा। इसके बाद कार खूंटी, कर्रा और डाल्टनगंज होते हुए बिहार की ओर रवाना हुई। बिहार पहुंचने के बाद कैरव को एक कमरे में रात भर रखा गया। इसी स्थान से 13 जनवरी की रात करीब 8 बजे अपहरणकर्ताओं ने कैरव के पिता देवांग गांधी और उसके चाचा को फिरौती के लिए कॉल की, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हो पाई। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर फिरौती की मांग की। जानका...