नई दिल्ली, मई 13 -- दिल्ली का एक 18 वर्ष का लड़का। भोर में अपने आंखों के सामने पिता को असमय आखिरी सांस लेते हुए देखता है। सुबह रणजी ट्रॉफी मैच के अगले दिन का खेल होना है। उसकी टीम संकट में है। फॉलोऑन का खतरा है। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा। पिता के अचानक निधन से टूटा वह लड़का जैसे-तैसे खुद को संभालता है। फैसला करता है कि मैच तो खेलूंगा। अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए। उनके अरमानों को पूरा करने के लिए। सपना ये कि बेटा एक दिन भारतीय क्रिकेट टीम में खेले। यह किस्सा किसी को भी रुला देगा। वह लड़का कोई और नहीं, क्रिकेट के आसमान का सबसे जगमगाता सितारा विराट कोहली थे। किंग कोहली वाकई अलग ही मिट्टी के बने हुए हैं। साल 2006 की बात है। दिल्ली में दिल्ली और कर्नाटक के बीच रणजी ट्रॉफी मैच चल रहा था। तब 18 साल के विराट कोहली दिल्ली की तरफ से खेल रहे ...
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