शामली, नवम्बर 30 -- शहर के जैन धर्मशाला में आयोजित प्रवचन में आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज ने कहा कि जैसे भारतीय सरकार लोगों को जागरूक करने के लिए विज्ञापन जारी करती है, उसी प्रकार जिनवाणी भी जागो श्रावक जागो का संदेश देकर आत्माओं को जगाने का कार्य करती है। श्रावक के जागृत होने से धर्म व्यवस्था को मजबूती मिलती है। देवपूजा, गुरु उपासना और स्वाध्याय जैसे कार्य वही कर सकता है जो प्रमादरहित और सजग हो। उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार ऐसे कार्य करने पड़ते हैं जिन्हें मजबूरी कहते हैं, लेकिन असल महत्व क्रिया के दौरान बरती गई सावधानी का है। जैसे सड़क पर लगे बोर्ड 'सावधानी हटी, दुर्घटना घटी' चेतावनी देते हैं, वैसे ही जीवन में थोड़ी सी असावधानी पाप को बढ़ा सकती है। भगवान महावीर के मोक्ष गमन के समय गौतम स्वामी के प्रश्न पर उन्होंने सूत्र दिया, चलते, ...
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