अलीगढ़, दिसम्बर 4 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवददाता। निजी अस्पताल अब इलाज के नाम पर कॉमर्शियल साम्राज्य बन गए हैं। यहां मरीज का दर्द नहीं, उसकी जेब पहले देखी जाती है। पैथोलॉजी व मेडिकल स्टोर, सब कुछ अस्पतालों की चारदीवारी में एक ही नेटवर्क के तहत चलता है। मरीजों पर जांच भी यहीं कराने का दबाव, दवाएं भी इन्हीं स्टोरों से लेने की अनिवार्यता, और ऊपर से मोटा कमीशन। यह पूरा सिस्टम इलाज को व्यापार में बदल चुका है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही इस मनमानी को और मजबूत कर रही है। सवाल यह है कि क्या मरीज अब अस्पताल में इलाज लेने जाएं या 'जबरिया खरीदारी' के लिए? चिकित्सा सेवाओं की जगह निजी अस्पतालों में अब कॉमर्शियल मॉडल हावी होता जा रहा है। इलाज लेने आने वाला मरीज किस डॉक्टर से मिलेगा, उससे पहले यह तय हो जाता है कि उसकी जांच कहां होगी और दवा कहां से ली जाएगी।...