कानपुर, जनवरी 7 -- अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहा संस्कृत महाविद्यालय -कहिंजरी स्थित विद्यालय में बैठने तक की जगह नहीं रसूलाबाद, संवाददाता। वर्ष 1914 में स्थापित श्रीकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय की पहचान अब मिटती जा रही है। यहां से शिक्षा ग्रहण कर तमाम विद्वान बाहर प्रदेशों में परचम लहरा रहे हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में सैकड़ों साल पुराने विद्यालय में बच्चों व शिक्षकों के बैठने तक की जगह अब नहीं बची है। यहां तैनात शिक्षक नीम के पेड़ की छांव में बैठकर ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। कानपुर देहात जिले के कहिंजरी में श्रीकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1914 में सेठ रामनारायण वैश्य ने कराई थी। विद्यालय का संचालन शुरू होने के बाद स्थानीय बच्चों के अलावा बाहरी जिलों से भारी संख्या में लोग आचार्य, शास्त्रीय की पढ़ाई करने आते थे। बाहरी बच्चों को खाना...
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