लखनऊ, जनवरी 21 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा है कि विधायिका लोकतंत्र का सबसे सशक्त और महत्वपूर्ण स्तंभ है। लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों का विशेष महत्व है। है। इन्हीं विचार-विमर्शों और मतभेदों के माध्यम से जनकल्याणकारी नीतियों और योजनाओं का निर्माण होता है। श्री महाना बुधवार को यहां आयोजित अखिल भारतीय 86वें पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के 62 वें सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनता प्रदेश के सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी पांच वर्षों के लिए अपने जनप्रतिनिधियों को सौंपती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जिस दल के अधिक विधायक होते हैं, उसी दल का मुख्यमंत्री बनता है, लेकिन विधायिका की वास्तविक शक्ति जनता के हितों की रक्षा और जनकल्याण की भावना में निहित होती है। उन्हों...
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