अल्मोड़ा, अक्टूबर 6 -- मशीनीकरण के कारण पौराणिक चित्रकला समाप्ति के कगार पर है। इसे संजोने के लिए प्रयास करने की जरूरत है। यह बात सोमवार को एसएसजे के दृश्यकला संकाय में हुए सम्मेलन में वक्ताओं ने कही। कुमाऊं के अलावा मिथिला, बक्सर, चित्रकूट जैसे क्षेत्रों की लोक कलाओं के बारे में जानकारी दी गई। सोमवार को एसएसजे के दृश्यकला संकाय में समाचार व विचार सम्मेलन और पूर्व छात्र कला प्रदर्शनी हुई। कार्यक्रम में दृश्यकला संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने कहा कि यहां के पूर्व छात्र आज विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। भविष्य मएसएसजे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि चित्रकला एक बहुत अच्छी विधा है। आज के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में इस पर कार्य करने की जरूरत है। कार्यक्रम में आगरा के आई वरिष्ठ साहित्यकार...
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