भदोही, दिसम्बर 10 -- ज्ञानपुर, संवाददाता। अरहर की फसल में फल छेदक कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। फसल में लक्षण दिखते ही कृषक विशेषज्ञों से परामर्श लेकर बचाव का प्रबंध करें ताकि उनके मेंहनत की कमाई चौपट न हो सके। फसल के प्रति थोड़ी सी लापरवाही किसानों की कड़ी मेंहनत और उम्मीदों पर पानी फेर देगा। अरहर की फसल नौ माह मेंहनत के बाद तैयार होता है। अब अरहर फसल में फली छेदक कीट का खतरा मडराने लगा है। पुरवा हवा चलता है तो इस कीट का प्रकोप और ज्यादा बढ़ जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं हेड डा. विश्वेंदु द्विवेदी ने बताया कि किसानों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरुरत है। अरहर की फसल को फली छेदक कीट से बचाव को खेत में चिड़ियों को बैठने का स्थान लकड़ी के डंड गाड़कर बनाते हैं। इसपर बैठी चिड़ियां फली छेदक कीट की सुड़ियों को...
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