अररिया, जनवरी 26 -- अररिया। वरीय संवाददाता गणतंत्र दिलाने में अररिया के सपूतों के संघर्षों को कभी भूलाया नहीं जा सकता। अतीत के पन्नों पर अररिया जिले के स्वतंत्रता सेनानियों की संघर्षों व कुर्बानियों की अनकही कहानी दबी पड़ी है, जिन्होंने मातृभूमि को ब्रिटिश हुकूमत से मुक्त कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। फिरंगियों की गोलियां खायी, लेकिन कभी पीछे नहीं हटे। आज के युवा पीढ़ियों को इनके संघर्ष और शहादत से संघर्ष लेने की जरूरत है। कहा जाता है कि आजादी के ये रणबांकुरे कई वर्षों तक गुमनामी के अंधेरे में दर-दर भटकते रहे और अन्तत: वतन के लिए शहीद हो गये। क्रांतिकारियों की जब भी चर्चा होती है तो सबसे पहले पंडित रामदेनी तिवारी 'द्विजदेनी' का नाम आता है। द्विजदेनी जी न केवल क्रांति का बिगुल फूंका बल्कि अपनी लेखनी से लोगों के मन में राष्ट्र...
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