नई दिल्ली, जुलाई 22 -- देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की कहानियां केवल इतिहास का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनती हैं। ऐसी ही एक प्रेरक गाथा है शहीद प्रमोद कुमार की, जो कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। उनके बड़े भाई श्याम नंदन कुमार यादव ने उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने का जो संकल्प लिया, वह आज शिक्षा के क्षेत्र में कई युवाओं का भविष्य संवार रहा है।किसान - सैनिक परिवार श्याम नंदन कुमार यादव, जो बिहार के एक किसान-सैनिक परिवार से आते हैं, वर्तमान में "शहीद प्रमोद ग्रुप ऑफ एजुकेशन" के निदेशक हैं। उनके चार भाइयों में से दुसरे स्थान पर प्रमोद कुमार भारतीय सेना में कार्यरत रहते हुए कारगिल युद्ध में शहीद हो गए। प्रमोद उनसे लगभग दस साल छोटे थे। अन्य भाइयों में दिलीप कुमार वर...
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