कानपुर, नवम्बर 26 -- कानपुर। प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण पराली पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बजाए अब किसानों को अमीर बना रहा है। पराली और गोबर की मदद से बड़ी मात्रा में बायोगैस तैयार की जा रही है। वैज्ञानिकों के नए अनुसंधान से अब 60 दिन में बनने वाली सीबीजी (कंप्रेस्ड बायोगैस) सिर्फ 15 से 20 दिन में तैयार हो रही है। वहीं, पांच टन सीबीजी के लिए अब 50 टन नहीं बल्कि 30 टन पराली की आवश्यकता पड़ रही है। यह बात केमिकल टेक्नोलॉजी के डॉ. सचिन कुमार ने कही। कहा, वैज्ञानिकों ने अब विशेष बैक्टीरिया का उपयोग कर पराली की मदद से सीबीजी तैयार कर रहे हैं। एचबीटीयू के जैव रासायनिक अभियंत्रण विभाग की ओर से अपशिष्ट से बायोगैस-बायोमीथेन का सतत विकास पर तीन दिवसीय नेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विवि के कुलपति प्रो. समशेर, डीन ...