मुंबई, फरवरी 16 -- महाराष्ट्र की राजनीति में बमुश्किल तीन महीने पहले ही तलवारें खिंची थीं। महायुति और महाविकास अघाड़ी के दलों में टकराव तेज था। नतीजे आए तो महायुति को फिर से सत्ता मिल गई और अब समीकरण भी बदलते दिख रहे हैं। ऐसी स्थिति में जॉन एलिया का एक शेर याद आता है- अब नहीं कोई बात ख़तरे की, अब सभी को सभी से ख़तरा है। यानी महाराष्ट्र की राजनीति में फिलहाल दोस्त और दुश्मन की पहचान करना मुश्किल है। क्रॉस दोस्ती और क्रॉस दुश्मनी के हालात हैं। कल तक विपक्षी गठबंधनों में रहे दल गले मिल रहे हैं तो वहीं साथियों के बीच अदावत के हालात हैं। महाविकास अघाड़ी में शामिल शरद पवार ने एकनाथ शिंदे को दिल्ली में सम्मानित किया तो उद्धव ठाकरे गुट भड़क गया। सम्मान को ही कह दिया कि ये या तो खरीदे जाते हैं या फिर बेचे जाते हैं। वहीं उद्धव सेना के नेता देवेंद्र...
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