भागलपुर, अगस्त 19 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता। अमूमन 40 वर्ष या इससे अधिक उम्र में होने वाली डायबिटीज बीमारी से अब छोटे-छोटे बच्चे पीड़ित हो रहे हैं। ऐसे बच्चों को जन्मजात इंसुलिन नहीं बनता है। इन्हें इंसुलिन की सुई लग रही है। मायागंज अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के शिशु विभाग में हर माह औसतन एक या दो बच्चे ऐसे मिल रहे जिन्हें डायबिटीज है। शिशुरोग विभाग के हेड डॉ अंकुर प्रियदर्शी ने बताया कि छोटे बच्चों में होने डायबिटीज को टाइप वन डायबिटीज कहते हैं। ऐसे बच्चों का इलाज सिर्फ दवा से नहीं होता है। इन्हें जीवन भर इंसुलिन पर रहना पड़ता है। आमतौर पर सैकड़ों में एकाध बच्चों को टाइप वन डायबिटीज होता है। महीने में ही एक या दो केस मिल ही जाते हैं। ऐसे बच्चों के परिजन को कहा जाता है कि इन्हें पूरी जिंदगी इंसुलिन देना होगा। ऐसे बच्चे सबसे पहले इमरजेंसी विभ...
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