अररिया, नवम्बर 8 -- सोशल मीडिया मसलन ट्विटर, इंस्ट्राग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक ने लिया इसका स्थान अब वो नहीं रहा पहले के तीन दशक वाला चुनाव सिकटी। एक संवाददाता विधानसभा चुनाव को लोकतंत्र का महोत्सव के रूप में मनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। लेकिन अब वैसा चुनावी माहौल नहीं है, जो दो-तीन दशक पहले तक हुआ करता था। अब न दीवारों पर नारे दिखाई देते हैं, न खंभों पर झंडे और न दुकानों-घरों पर पोस्टर से पटा हुआ दिवाल। पहले बिजली के खंभों पर राजनीतिक दलों के झंडे लहराया करते थे। गली-मोहल्ले में पर्चे, झंडे और बैनर व दीवारों पर चुनावी नारे लिखना अब बीते जमाने की बात हो गई है। चुनावी जंग गली-मोहल्लों से दूर सोशल मीडिया मसलन ट्विटर, इंस्ट्राग्राम, व्हाट्सएप और फेसबुक पर ज्यादा दिख रहा है। 80 वर्षीय हिन्दी और अंग्रेजी के विद्वान प्रो विश्वनाथ मिश्...
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