बांदा, जनवरी 3 -- बांदा। संवाददाता मरीज जिंदा रहे या मर जाए हमें तो वैक्सीन लगवाने से मतलब आयुष भवन के अप्रशिक्षित डॉक्टरों के हाथों, कुत्ता, बिल्ली, काटने की वैक्सीन लगवाने की कमान सौंप दी गई है। जबकि वैक्सीन ट्रेनिंग शुदा एमबीबीएस डॉक्टर की देखरेख में लगना चाहिए। लेकिन जिम्मेदार इस ओर कोई ध्यान नही दे रहे हैं। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में अवारा कुत्तों का आतंक जारी है। आए दिन कुत्ते आधा सैकड़ा से अधिक लोगों को काटकर जख्मी कर देते हैं। जिला अस्पताल में कुत्ता काटने की वैक्सीन लगवाने की कमान आयुष डॉक्टरों को सौपीं गई है। जो आप्रशिक्षित होते हैं। वहीं डॉक्टर मासूम बच्चा हो या बुजुर्ग को वैक्सीन लगवाते हैं। आयुष की गाइड लाइन में इंजेक्शन व वैक्सीन लगवाने का कहीं जिक्र्र नहीं है। फिर भी जिले के जिम्मेदार अधिकारी उनसे इंजेक्शन और वैक्सीन लगवान...
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