विधि संवाददाता, नवम्बर 1 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि किसी किशोर को उसके द्वारा किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है, तो उसकी दोषसिद्धि को नौकरी में नियुक्ति के लिए अयोग्यता नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2000 की धारा 19, जो किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 24 के लगभग समान है, पर भरोसा करते हुए कहा है कि अधिनियम के तहत किशोर की दोषसिद्धि को सेवाओं में नियुक्ति के लिए अयोग्यता नहीं माना जाएगा। यह भी पढ़ें- यूपी के 7 जिलों में भारी बारिश, 18 में तेज हवा; गरज-चमक के साथ गिर सकती है बिजली हाईकोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम 2000 की धारा 19 में प्रावधान है कि किसी अन्य कानून में किसी बात के होते हुए भी कोई किशोर जिसने कोई अपराध किया ह...