नई दिल्ली, अक्टूबर 29 -- आर के राघवन,पूर्व निदेशक, सीबीआई नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) ने हाल ही में अपनी 'क्राइम इन इंडिया 2023' रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में देश में अपराध की स्थिति का पूरा विश्लेषण है। सरकार के अंदर और बाहर इसकी स्वीकृति है। मगर इन आंकड़ों का इस्तेमाल करने वाले कई लोग रिपोर्ट में दिए आंकड़ों को शक की निगाह से देखते हैं। उनमें से एक छोटे समूह का तो यहां तक मानना है कि छवि चमकाने के लिए रिपोर्ट में हेर-फेर किया गया है। समस्या यह है कि अगर आप एनसीआरबी रिपोर्ट को खारिज करते हैं, तो सार्वजनिक तौर पर ऐसा कुछ और नहीं है, जिससे आपको अपराध की घटनाओं, उनकी प्रकृति और प्रवृत्ति आदि की तस्वीर का पता चल सके। इसकी यह आलोचना सही है कि अपराध के आंकड़े एक साल से ज्यादा पुराने होते हैं। मगर यह देरी इसलिए होती है, क्योंक...
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