नई दिल्ली, जनवरी 16 -- सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका लंबित होने के बावजूद अनुच्छेद-32 के तहत याचिका दायर करने वाले एक याचिकाकर्ता से शुक्रवार को नाराजगी जताई। अनुच्छेद-32 नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर शीर्ष अदालत से संवैधानिक उपचार का अनुरोध करने का अधिकार देता है। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालयों में स्थगन जैसे मामलों को लेकर भी अनुच्छेद-32 के तहत याचिकाएं दायर कर इसका दुरुपयोग किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि अनुच्छेद-32 का दुरुपयोग हो रहा है। अनुच्छेद-32 के तहत दायर मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर छोटी बात पर, एक स्थगन पर भी, यहां अनुच्छेद-32 के तहत याचिका दायर कर दी जाती है। खासकर दिल्ली के आसपास के लोग अनुच्छेद-32 के तहत याचिकाएं दायर कर रहे हैं...