संभल, जनवरी 21 -- चन्दौसी। पिता को न्याय दिलाने की जिद्द में एक बेटे ने अधिवक्ता की पढ़ाई कर 23 साल पुराने मामले में पिता को बरी कराकर न सिर्फ परिवार का सम्मान बचाया, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास को भी मजबूत किया। हालांकि बीमारी के चलते 2023 में उनके पिता की मौत हो गई थी, लेकिन न्याय की लड़ाई अधिवक्ता बेटे ने जारी रखी और जीत हासिल की। चंदौसी के चतुर्वेदी मेडिकल स्टोर पर वर्ष 2002 में पुलिस व आबकारी की संयुक्त टीम ने छापा मारा था। टीम ने मौके से दवा की 1703 शीशियां व नकदी बरामद की थी। जिस दवा की शीशियों में शराब बताकर विपिन चंद्र चतुर्वेदी को और दुकान सुधीर को आरोपी बनाया गया था। तब विपिन चंद्र चतुर्वेदी का बेटा तीर्थ किशोर नाबालिक था और पढ़ रहा था, जब से समझ आई तो उसने पिता को निर्दोष साबित करने की ठान ली। पिता के सिर से यह कंलक हटाने...
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