पटना, जुलाई 16 -- अधिग्रहित सरकारी जमीन का दस्तावेज अधूरा रहने पर भी इसका दाखिल-खारिज हो सकेगा। इसका मकसद अधिग्रहित जमीन पर दोबारा मुआवजा संबंधी विवाद की समस्या का समाधान करना है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त सहित सभी समाहर्त्ताओं को पत्र लिखा है। अधिकारियों के अनुसार, अधिग्रहित सरकारी जमीन का दाखिल खारिज नहीं होने से पुरानी जमाबंदी में ही जमीन दिखती रहती है। ऐसी स्थिति में बेवजह विवाद पैदा होने का डर होता है। साथ ही रैयतों के वंशजों द्वारा दोबारा मुआवजे का क्लेम करने का अंदेशा रहता है। इसमें पहले नंबर पर वैसे विभाग या संस्थान हैं, जिनके स्वामित्व की भूमि के अधिग्रहण से संबंधित पूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे दस्तावेजों में भू-हस्तां...
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