मुंगेर, फरवरी 1 -- मुंगेर, एक संवाददाता। संग्रामपुर बाजार आज अतिक्रमण और प्रशासनिक उदासीनता का ऐसा उदाहरण बन चुका है, जहां आमजन का चलना-फिरना तक दूभर हो गया है। बाजार की सड़कें सिकुड़ चुकी हैं, फुटपाथ का नामोनिशान नहीं है और जाम यहां की रोजमर्रा की सच्चाई बन गया है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि, आखिर उन्हें अतिक्रमण से कब मुक्ति मिलेगी और कब संग्रामपुर को एक सुचारू, सुरक्षित और सुंदर बाजार नसीब होगा। सड़क पर बाजार, अतिक्रमण बना अधिकार स्थानीय नागरिकों के अनुसार, संग्रामपुर बाजार में करीब 100 ठेला-रेड़ी वाले और 200 से अधिक स्थायी एवं अस्थायी दुकानदार फुटपाथ से लेकर सड़क तक फैले हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि, कई दुकानदार अतिक्रमण को अपना अधिकार मान बैठे हैं। स्थायी दुकानदार भी दुकान के बाहर तक सामान सजाकर सड़क को और संकरा कर रहे हैं। संकरी स...