जमशेदपुर, जनवरी 16 -- सकरात परब (मकर संक्रांति) प्रकृति पूजक आदिवासी समाज का बड़ा पर्व है। इस पर्व पर आदिवासी समाज के लोग विविध परंपराओं का पालन करते हैं। गुरुवार को परब के दूसरे दिन अखान जातरा मनाया गया। इस अवसर पर चिड़ी दाग (छूंज) की परंपरा का निर्वहन किया गया। इसके तहत तांबे के गर्म तार से बच्चों के पेट को दागा जाता है। पेट पर नाभि के आसपास चार बार गर्म ताम्बे के तार से बच्चों को दागा गया। मान्यता है कि ऐसा करने से बच्चे पेट की बीमारी से हमेशा के लिए निरोग रहते हैं। आदिवासी समाज में चिड़ी दाग (छूंज) की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि अब इक्का-दुक्का गांवों में बहुत कम लोग ही इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। अधिकतर आदिवासियों में इसे अंधविश्वास करार देकर नकार दिया है। गुरुवार को सरजमदा परसूडीह में चिड़ी दाग (छूंज) की परंपरा का निर...