रांची, फरवरी 13 -- रांची, विशेष संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) में शुक्रवार को विशेष वैचारिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय सह संयोजक विनय दीक्षित ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि वर्तमान समय में अकादमिक जगत के भीतर भारत-केंद्रित विमर्श को सशक्त रूप से स्थापित करना अनिवार्य हो गया है। कहा कि यह केवल घटनाओं का विवरण मात्र नहीं है, बल्कि समाज के चिंतन और वैचारिक दिशा को प्रभावित करने वाला एक अत्यंत प्रभावी माध्यम है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अतीत में कई अवसरों पर भ्रामक और पक्षपाती आख्यानों के माध्यम से भारत के सांस्कृतिक व बौद्धिक मानस को प्रभावित करने के प्रयास हुए हैं। ऐसी चुनौतियों का सामना करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका निर्णायक हो जाती है। उन्होंने आख्यान...