मैनपुरी, अगस्त 30 -- घिरोर। दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा-अर्चना की गई। सुबह नगर के जैन मंदिरों में भगवान का जलाभिषेक हुआ और श्रावक-श्राविकाओं ने विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न की। पूजा के दौरान नवदेवता, पंचमेरु, सोलह करण और दशलक्षण पूजा की गई। धर्म प्रवचन में बताया गया कि मार्दव धर्म का वास्तविक अर्थ अहंकार और घमंड का त्याग करना है। जीवन में विनम्रता और मृदुता का भाव अपनाने वाला ही सच्चे अर्थों में मार्दव धर्म का पालन करता है। मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी कटुता या कठोरता का भाव नहीं रखना चाहिए बल्कि दुखियों की सेवा करने वालों पर सदा भगवान की कृपा बनी रहती है। घमंड और अहंकार से विनाश होता है जबकि विनम्रता और सरलता से जीवन में सुख-शांति आती है। जिसने अहंकार को मार दिया वही वास्तव में मार्दव धर्म का अनुयाई है। इस मौके...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.